ऐतिहासिक ट्रांस ओरल एंडोस्कोपिक सर्जरी ने बचाई कैंसर के आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके 75 वर्शीय अलवर के बुजुर्ग की जान

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ऽ डाॅ. मनदीप मल्होत्रा के मार्गदर्षन में रोगी का किफायती जीवनरक्षक इलाज किया गया
ऽ रोगी ने खुद को उम्मीद के पहल के तहत सब्सिडी प्राप्त इलाज के लिए रजिस्टर किया था
 
अलवर, 27 दिसंबर 2017ः  राजस्थान के अलवर के 75 वर्शीय निवासी श्री नसीरा ओरोफैरिंजियल कैंसर के आखिरी मुकाम पेे थे जब डाॅक्टरों ने मामूली एंडोस्कोपिक मषीनों की मदद से उनकी बेहद जटिल सर्जरी कर कैंसर को निकाला। आमतौर पे कैंसर की सर्जरी के लिए रोबोट का प्रयोग किया जाता है लेकिन यह पहला ऐतिहासिक मौका है जब सधाराण एंडोस्कोपिक मषीनों की मदद से सफलता पूर्वक सर्जरी की गई है। सर्जरी करने से पूर्व फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल हाॅस्पिटल (एफएचवीके) के हेड, नेक एवं ब्रेस्ट आॅन्कोप्लास्टी डिपार्टमेंट के डाॅ. मनदीप एस मल्होत्रा और उनकी टीम ने काफि षोघ किया जिसके कारण सर्जरी की लागत एक-तिहाई हो गई।
 
श्री नसीरा ने खुद को उम्मीद के तहत एफएचवीके में नामांकित कराया था जिसके तहत गुणवत्तापूर्ण और किफायती कैंसर केयर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाता है। इसके तहत सुविधाओं से वंचित लोगों को ओरल एवं ब्रेस्ट कैंसर का सब्सिडाइज़्ड इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इस पहल के जरिए नसीरा डाॅ. मल्होत्रा और उनकी टीम से मिले। इस टीम में डाॅ. दीपक झा और डाॅ. योगेष जैन भी षामिल थे। डाॅ. मल्होत्रा और उनकी टीम ने अनूठी ’ट्रांस ओरल वीडियो एंडोस्कोपिक सर्जरी (टीओवीईएस)’ की मदद से रोगी को इस समस्या से छुटकारा दिलाया। 
 
टीओवीईएस, ओरोफैरिंजियल कैंसर (टाॅन्सिल एवं जीभ के पिछले हिस्से; गले के कैंसर) के इलाज का तरीका है, जिसमें पारंपरिक एंडोस्कोपी (लैप्रोस्कोपी) उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जो उन उपकरणों के समान ही होते हैं, जिनका उपयोग लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी करने में होता है। इनकी लागत रोबोटिक सर्जरी के मुकाबले एक-तिहाई होती है और ओपन सर्जरी के विपरीत इसमें षरीर को भी इतना नहीं खोलना पड़ता। ओपन सर्जरी में गर्दन और जबड़े की हड्डी के पास चीरा लगाया जाता है। ट्रांस ओरल सर्जरी के लिए इन उपकरणों को उपयुक्त बनाने में दो महीने का सुधार और कोषिष लगती है। इस तकनीक से सर्जन को रोगी के सिरहाने खड़े होकर डाॅक्टर-रोगी कनेक्ट को बनाए रखने में मदद मिलती है। ट्रांस ओल वीडियो एंडोस्कोपिक सर्जरी (टीओवीईएस) को नाम जापान से मिला है और रोबोटिक सर्जरी (टीओआरएस) के मुकाबले इससे इलाज की लागत काफी कम हो जाती है, जिससे यह इलाज समाज के एक बड़े वर्ग की पहुंच के दायरे में आता है। इसके साथ ही इसमें डायरेक्ट डाॅक्टर-रोगी कनेक्ट भी होता है। टीओवीईएस जैसी सर्जिकल तकनीक का व्यापक स्तर पर आकलन, षोध, सुधार होना चाहिए और देष ही नहीं बल्कि दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा लोगों के फायदे के लिए इसका इस्तेमाल भी होना चाहिए।
 
सफलतापूर्वक यह सर्जरी पूरी करने के बाद डाॅ. मनदीप ने कहा, ’’टीओवीईएस से इलाज करने से पहले हमने इस पर गहन अध्ययन एवं षोध किया। हमारा मुख्य उद्देष्य यह सुनिष्चित करना था कि रोगी को इससे वही परिणाम मिले, जो रोबोटिक सर्जरी से मिलते हैं। यह करना आसान नहीं था क्योंकि इसकी तैयारी एवं टीओवीईएस प्रक्रिया को रोगी के लिए व्यावहारिक बनाने में हमें दो महीने का समय लगा। टीओवीईएस कराने से ट्रांसओरल तरीके के लाभ बेहद कम कीमत में मिलने का फायदा होता है जबकि ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (टीओआरएस) के जरिए ओरोफैरिंजियल कैंसरों का इलाज काफी महंगा पड़ता है। दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भलाई के लिए टीओवीईएस जैसी तकनीकों का आकलन, षोध, सुधार और उपयोग बढ़ना चाहिए।’’
 
एफएचवीके के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री संदीप गुदरू ने कहा, ’’जब डाॅ. मनदीप और उनकी टीम अपने गहन अध्धयन एवं षोध को लेकर मेरे पास आए तो मुझे पूरा भरोसा था कि यह ओरल कैंसर के इलाज में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण और इनोवेटिव सर्जरी को करने में बड़ी मेहनत की और इस तरह उन्होंने ओरल कैंसर के इलाज का ऐसा तरीका खोज निकाला जो अच्छे परिणाम देता है और लागत में भी काफी किफायती है। मुझे डाॅक्टरों और मेडिकल स्टाफ में इस तरह का जुनून देखकर बहुत खुषी हुई है। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए कैंसर के इलाज में क्रांति ला दी है, जिनके लिए पहले इसका इलाज कराना पहुंच से बाहर था और इस तरह उन्होंने नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।’’
 
रिकवरी के बाद श्री नसीरा ने कहा, ’’मुझे सूझ ही नहीं रहा था कि मैं क्या करूं। इस बीमारी का पारंपरिक इलाज कराना मेरी पहुंच के बाहर था और इसलिए मैंने खुद को यूएमएमईडी के तहत रजिस्टर कराया। मैं तो खाना और हंसना भूल ही गया था लेकिन फोर्टिस हाॅस्पिटल वसंत कुंज के डाॅक्टरों की टीम ने मेरे जीवन में खुषियां लौटा दीं। यूएमएमईडी के तहत पंजीकरण कराने से मुझे काफी मदद मिली क्योंकि इससे मुझे पता चला कि मुझे किसके पास जाना है और इलाज के लिए बात करनी है। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि अब मैं काफी बेहतर स्थिति में हूं और मैं टीओवीईएस इलाज का स्वस्थ, सफल एवं जीवित उदाहरण हूं। मैं पूरी तरह से फोर्टिस के डाॅक्टरों पर निर्भर था और उन्होंने अपना बेहतरीन प्रदर्षन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुझे उन पर पूरा भरोसा था और उन्होंने मुझे उस कीमत पर इलाज उपलब्ध कराया जिसका खर्च मैं उठा सकता था।’’
 
2010 से ही सिर और गर्दन विषेश तौर पर ओरोफैरिंजियल कैंसर के ट्रांस ओरल तरीके से इलाज के लिए रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस तकनीक को टीओआरएस (ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी) कहते हैं। टीओआरएस में सर्जन रोगी से कुछ दूरी पर रखे कंसोल पर बैठता है और हाथों वाली रोबोटिक मषीन को रोगी के मुंह में रखा जाता है। यह काफी महंगी होती है लेकिन इससे सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज करते समय मुष्किल हिस्सों में पहुंचने में सटीकता और सुगमता होती है विषेश तौर पर ओरोफैरिंजियल कैंसर (मुंह के अंदरूनी/पिछले हिस्से में) इलाज के लिए इसका इस्तेमाल सबसे आम है। टाॅन्सिल, जीभ की जड़ और पोस्टेरोलेटरल फैरिंजियल वाॅल के कैंसर या ट्यूमर तक पहंुचना बहुत मुष्किल होता है। टीओवीईएस ऐसी ही सटीकता और सुगमता लाने में टीओआरएस का विकल्प बन सकती है वह भी कम लागत और कम चीरे के साथ।